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आयकर अधिकारी कैसे बने


आयकर अधिकारी कैसे बने? इसके बारे में सारी जानकारी हिंदी में पढ़े। income tax officer kaise bane

income tax officer kaise bane  आज की इस भागदौर भरी इस जिंदगी में हर कोई सपना देखता है और उसे पूरा करने जुटा रहता है। कोई डॉक्टर बनना चाहता है कोई इंजीनियर बनना चाहता है कोई बिजनेसमैन बनना चाहता है तो कोई पायलट तो कोई एक्टर तो क्रेटर ऐसे ही कुछ लोगो का सपना आयकर अधिकारी बनने का होता है और इस सपने को पूरा के लिए पूरी मेहनत और डेडिकेशन करने की जरूरत पड़ती है तब जाकर यह सपना पूरा हो पाता है।

अगर आप भी आयकर अधिकारी बनना चाहते तो आपके इससे बनने की सारी जानकारी आपके पास होनी चाहिए। अगर नहीं है कोई बात नहीं में आज आपको बताने बाला हूँ कि आयकर अधिकारी कैसे बने? income tax officer kaise bane. आयकर अधिकारी बनने के लिए आपको क्या – क्या करना पड़ेगा। ताकि आप अपने इस सपने को पूरा कर सके। तो चलिए सबसे आपको जाना होगा। income tax kya hota hai.

अनुक्रम  दिखाएँ 

आयकर क्या होता है? Income tax kya hota.

आयकर (income tax) यह वह कर (Tax) होता है जो डारेक्ट कर (tax) की कैटागिरी में आने बाला कर (tax) होता है  जो कि हमारी आय पर लगाया जाता है और यह सरकार का इम्पोर्टेन्ट इनकम सोर्स है। जिसमे हमारी आय पर हर साल लगाया जाता है जिसमे हमें हर साल अपनी इनकम में से केंद्र सरकार (central government) को देना होता है। ताकि सरकारी कामो को करने के लिए जो भी खर्चे होते है उनको पूरा किया जा सके।

अब आपको पता लग गया होगा की आयकर क्या होता है अब बात आती है आयकर अधिकारी का क्या काम होता है

आयकर अधिकारी कोन होता है income tax officer kaise bane

भारत में (Central Board Direct Taxes) (CBDT) का एक विभाग (Department) होता है जिसमे एक अधिकारी (Officer) आयकर अधिकारी (Income Tax Office) (ITO) होता है। इस विभाग में आय को लेकर कठिनाईयों (Problems) को ठीक (solve) करता है।

आयकर अधिकारी यह काम होता है कि आय के दोषियों (Defaulters) को पकड़े और और उन्हें सूचना (Notice) भेजे ताकि वह अपना कर (TAX) भरे। इस पद (Post) पर बने रहना इतना आसान नहीं होता है। इस काम को करने के लिए बेहद चालक और तेज़ दिमाग बाला होना चाहिए क्योंकि। दोषियों को हैंडल कर सके।

आयकर अधिकारी कैसे बने? income tax officer kaise bane.

अगर आप आयकर अधिकारी बनना चाहते है तो इसके लिए जरूरी है आपके पास किसी भी विषय से ग्रैजुएशन की  डिग्री होना अनिवार्य है। इसके बिना आप (SSC) का (CGL EXAM) देने के लिए आवेदन नहीं कर सकते है। और आयकर अधिकारी बनने के लिए आपको (SSC) का (CGL EXAM) पास करना अनिवार्य होता है।

आयकर अधिकारी बनने के लिए आपको उम्र सबसे कम 18 साल और सबसे ज्यादा उम्र 28 साल होनी चाहिए। इसमें ST/SC वर्ग के लोगों को 5 साल की छूट दी गयी है। OBC वर्ग के उम्मीदवारों को 3 साल की और PWD के उमीदवारो को 10 साल की छूट दी गयी है।

आयकर अधिकारी की परीक्षा। Income Tax Officer Exam.

आयकर अधिकारी बनने के लिए आपको परीक्षा पास करनी होती है जो कि (SSC) द्बारा (CGL EXAM) का आयोजन किया जाता है। SSC द्बारा हर साल आयकर अधिकारी बनने के लिए आवेदन निकले जाते है। (SSC) की परीक्षा दो चरणों में ली जाती है और इन दोनों चरणों की परीक्षाओ को पास करने करने बाद आप आयकर अधिकरी बन सकते है।

पहला चरण –

दोस्तों पहले चरण की की परीक्षा में जितने भी SSC की पीरक्षा के लिए आवेदन किया होता है उन सभी को बुलाया जाता है। उनसे Objective तरह के प्र्शन पूछे जाते है। और इन प्रशनो को पूरा करने के लिए सिर्फ 2 घंटे का टाइम दिया जाता है।

Exam Syllabus:-

विषयप्रश्नों की संख्याअंकसमय
सामान्य ज्ञान  (भाग A)1001002 घंटे
गणित (भाग B)1001002 घंटे

दूसरा चरण –

यह आयकर बनने का दूसरा चरण है इसमें केबल वही उमीदवाद आ सकते है जिन्होंने पहले चरण के पेपर को पास किया होता है। इस दूसरे चरण में 4 पेपर का आयोजन किया जाता है।

Exam Syllabus:-

विषयअंकसमय
सामान्य अध्ययन2003 घंटे
अंग्रेजी1002 घंटे 20 मिनट
अंक गणित2004 घंटे
भाषा1002 घंटे 40 मिनट
संचार कौशल और लेखन2002 घंटे 20 मिनट
 दस्तावेज सत्यापन document verification.

दोस्तों इन दोनों चरणों के पेपर को पूरा करने के बाद उमीदवार को दस्तावेज सहित बुलाया जाता है उसमे उमीदवाद का शारीरक प्रक्षिक्षण और दिम्माग को टेस्ट किया जाता है की वह कोई दिमाग रूप से कमजोर तो नहीं है। फिर उसके बाद मेरिट लिस्ट निकली जाती है। जिसमे उम्मीद बार कर प्रदर्शन क हिसाब पर रैंकिंग दी जाती है। और जिस उमीद्बार का नाम मेरिट लिस्ट में होता है वह उमीदवार को आयकर अधिकारी (Income Tax Officer) बनाया जाता है।

आयकर अधिकारी की तख्वा कितनी होती है ? income tax officer ki salary kitni hoti hai.

दोस्तों आयकर अधिकारी की तख्वा उसके payscale के हिसाब से दी जाती है। वैसे तो आयकर अधिकरी की तख्वा 40000 रूपये तक हो सकती है। और यह निर्भर करता है उसकी नौकरी कोन से एरिया में दी गयी है और उसका पद कोन सा है। चलिए अब बात करते है payscale के बारे में।-

  1. पे स्केले (Pay scale) = 9300-34800 Rupees.
  2. ग्रेड पे (Grad pay) = 4600 Rupees.
  3. प्रारंभिक वेतन (Initial pay) = 9300 Rupees.
  4. कुल वेतन (Total Pay)= 13900 Rupees.
आपकी राय

आयकर अधिकारी कैसे बने? income tax officer kaise bane. दोस्तों यह था मेरा आर्टिकल आपको कैसे लगा मुझे यह कमेंट करके जरूर बताये। और अपने दोस्तों के साथ साँझा जरूर करे ताकि उन्हें भी पता लग सकते की आयकर अधिकारी कैसे बने? income tax officer kaise bane. और अगर मेरे इस आर्टिकल में कुछ कमी रह गयी हो या फिर कुछ गलत जानकरी दी गयी हो तो भी आप कमेंट कर सकते है

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मेरा नाम वनिता कासनियां पंजाब है और मुझे इस ब्लॉग के माध्यम से अपने ज्ञान को इंटरनेट उपयोगकर्ताओं के साथ बांटना पसंद है। इस ब्लॉग के जरिए मैं टेक्नोलोजी से संबंधित जानकारियां शेयर करती हूं।


टिप्पणियाँ

  1. #राम_लक्ष्मण_जानकी_जय_बोलो_हनुमान_की
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    दरबार के सभी
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    🔱🎪 हार्दिक शुभकामनाएं🎪🔱
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    ‼️या देवी सर्वभू‍तेषु मां महागौरी रूपेण संस्थिता‼️
    ‼️नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः‼️
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    ༺꧁ #ॐ_देवी_ #महागौरी_नमः꧂༻

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    #काश_हर_सुबह___ #नवरात्र_सी___होती...!!

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    महागौरी पूजा दुर्गा अष्टमी एवम् कन्या पूजन कि ढेरों शुभकामनाएं माता रानी की कृपा आप और आपके परिवार पर हमेशा बनी रहे। 🙏🌺🔱🚩

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    #राम_नवमी_30_मार्च_2023_को_है:-
    🌹🌿🌹🌿🌹🌿🌹🌿🌹🌿🌹🌿🌹
    इस साल राम नवमी बहुत खास मानी जा रही है, क्योंकि राम नवमी के दिन कई दुर्लभ योग बन रहे हैं. जानते हैं राम नवमी पर पूजा का मुहूर्त और शुभ योग, उपाय, राम नवमी पर बन रहे हैं 5 अति दुर्लभ योग, जानें डेट, पूजा का मुहूर्त
    शास्त्रों के अनुसार चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को भगवान श्री राम का जन्मोत्सव मनाया जाता है. ये चैत्र नवरात्रि का नौवां और आखिरी दिन होता है. इस दिन राम मंदिर श्रीराम का भव्य श्रृंगार होता है. रामलला के जन्म के वक्त विधि विधान से पूजा की जाती है और ढोल नगाड़े बजाए जाते हैं. इस साल राम नवमी बहुत खास मानी जा रही है, क्योंकि राम नवमी के दिन कई दुर्लभ योग बन रहे हैं जिससे इस दिन का महत्व बढ़ गया है. आइए जानते हैं राम नवमी पर पूजा का मुहूर्त और शुभ योग.

    #राम_नवमी_शुभ_मुहूर्त:-
    🌹🌿🌹🌿🌹🌿🌹🌿🌹
    पंचांग के अनुसार चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि 29 मार्च 2023 को रात 09 बजकर 07 मिनट पर आरंभ हो रही है. नवमी तिथि की समाप्ति 30 मार्च 2023 को रात 11 बजकर 30 मिनट पर होगी.

    #राम_लला_की_पूजा_का_मुहूर्त:-
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    सुबह 11:17 - दोपहर 01:46 (अवधि 02 घण्टे 28 मिनट्स)
    अभिजित मुहूर्त - दोपहर 12.01 - दोपहर 12.51

    #राम_नवमी_शुभ_योग:-
    🌹🌿🌹🌿🌹🌿🌹🌿🌹
    राम नवमी पर इस बार 5 शुभ योग गुरु पुष्य योग, अमृत सिद्धि योग, रवि योग, सर्वार्थ सिद्धि योग और गुरुवार का संयोग बन रहा है. राम नवमी के दिन इन पांचों योग के होने से श्रीराम की पूजा का शीघ्र फल मिलेगा साथ ही इस दिन किए तमाम कार्यों में सिद्धि और सफलता प्राप्त होगी.

    #गुरु पुष्य योग:- 30 मार्च 10.59 - 31 मार्च सुबह 06.13

    #अमृत_सिद्धि_योग:- 30 मार्च, 10.59 - 31 मार्च,सुबह 06.13

    #सर्वार्थ_सिद्धि_योग_पूरे_दिन

    #रवि_योग_पूरे_दिन

    गुरुवार श्रीराम भगवान विष्णु के 7वें अवतार हैं और गुरुवार का दिन विष्णु जी को अति प्रिय है. ऐसे में राम जन्मोत्सव गुरुवार के दिन होने से इसका महत्व और बढ़ गया है।

    #राम_नवमी_के_दिन_क्या_करें:-
    🌹🌿🌹🌿🌹🌿🌹🌿🌹🌿🌹
    राम नवमी के दिन शुभ मुहूर्त में नभगवान श्रीराम का केसर युक्त दूध से अभिषेक करें. फिर घर में रामायण का पाठ करें. कहते हैं जहां रामायण पाठ होता है वहां श्रीराम और हनुमान जी वास रहता है. इससे घर में खुशहाली आती है. धन वैभव की वृद्धि होती है.
    रामनवमी के दिन एक कटोरी में गंगा जल राम रक्षा मंत्र 'ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं रामचन्द्राय श्रीं नम:' का जाप 108 बार करें. अब घर के हर कोने-छत पर इसका छिड़काव करें. मान्यता है इससे घर का वास्तु दोष दूर होता है, टोने-टोटके का असर नहीं रहता है.

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  2. #राम_लक्ष्मण_जानकी_जय_बोलो_हनुमान_की
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    महागौरी पूजा दुर्गा अष्टमी एवम् कन्या पूजन कि ढेरों शुभकामनाएं माता रानी की कृपा आप और आपके परिवार पर हमेशा बनी रहे। 🙏🌺🔱🚩

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    #राम_नवमी_30_मार्च_2023_को_है:-
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    इस साल राम नवमी बहुत खास मानी जा रही है, क्योंकि राम नवमी के दिन कई दुर्लभ योग बन रहे हैं. जानते हैं राम नवमी पर पूजा का मुहूर्त और शुभ योग, उपाय, राम नवमी पर बन रहे हैं 5 अति दुर्लभ योग, जानें डेट, पूजा का मुहूर्त
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    #राम_नवमी_शुभ_मुहूर्त:-
    🌹🌿🌹🌿🌹🌿🌹🌿🌹
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    #राम_लला_की_पूजा_का_मुहूर्त:-
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    सुबह 11:17 - दोपहर 01:46 (अवधि 02 घण्टे 28 मिनट्स)
    अभिजित मुहूर्त - दोपहर 12.01 - दोपहर 12.51

    #राम_नवमी_शुभ_योग:-
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    राम नवमी पर इस बार 5 शुभ योग गुरु पुष्य योग, अमृत सिद्धि योग, रवि योग, सर्वार्थ सिद्धि योग और गुरुवार का संयोग बन रहा है. राम नवमी के दिन इन पांचों योग के होने से श्रीराम की पूजा का शीघ्र फल मिलेगा साथ ही इस दिन किए तमाम कार्यों में सिद्धि और सफलता प्राप्त होगी.

    #गुरु पुष्य योग:- 30 मार्च 10.59 - 31 मार्च सुबह 06.13

    #अमृत_सिद्धि_योग:- 30 मार्च, 10.59 - 31 मार्च,सुबह 06.13

    #सर्वार्थ_सिद्धि_योग_पूरे_दिन

    #रवि_योग_पूरे_दिन

    गुरुवार श्रीराम भगवान विष्णु के 7वें अवतार हैं और गुरुवार का दिन विष्णु जी को अति प्रिय है. ऐसे में राम जन्मोत्सव गुरुवार के दिन होने से इसका महत्व और बढ़ गया है।

    #राम_नवमी_के_दिन_क्या_करें:-
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    राम नवमी के दिन शुभ मुहूर्त में नभगवान श्रीराम का केसर युक्त दूध से अभिषेक करें. फिर घर में रामायण का पाठ करें. कहते हैं जहां रामायण पाठ होता है वहां श्रीराम और हनुमान जी वास रहता है. इससे घर में खुशहाली आती है. धन वैभव की वृद्धि होती है.
    रामनवमी के दिन एक कटोरी में गंगा जल राम रक्षा मंत्र 'ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं रामचन्द्राय श्रीं नम:' का जाप 108 बार करें. अब घर के हर कोने-छत पर इसका छिड़काव करें. मान्यता है इससे घर का वास्तु दोष दूर होता है, टोने-टोटके का असर नहीं रहता है.

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🌹🪴गीता ज्ञान🪴🌹मासिक धर्म का कारण है इंद्र के द्वारा किया गया यह पाप By बाल वनिता महिला वृद्ध आश्रममसिक धर्म मासिक धर्म को लेकर कई मान्यताएं प्रचलित हैं । जहाँ वैज्ञानिक इसे एक जैविक प्रक्रिया बताते हैं वहीँ इसे हमारी प्रचलित मान्यताओं में अपवित्र कहा गया है । इस दौरान महिलाओं का मंदिरों में प्रवेश निषेध है । पवित्र कामों को करने के लिए महिलाओं को मासिक धर्म के वक्त मनाही रहती है । यह विषय हमेसा से ही चर्चा का विषय रहा है और जमाने भर के लेखकों नेऔर दार्शनिकों ने इस पर बहुत कुछ कहा है । हमारा आज का विषय मासिक धर्म से जुड़ी मान्यताओं को सही या गलत ठहरना नहीं है । हम आज आपको बताएँगे कि इस विषय से जुड़ी हमारे धर्म शास्त्रों में कौन सी कहानी बताई गयी है ।इंद्र के द्वारा किया गया पापइंद्र के द्वारा किये गए पाप की सजा सभी महिलाओं को मिली और तब से उन्हें मासिक धर्म की पीड़ा को सहना पड़ता है । हमारे धर्म शास्त्रों में कई तरह के पाप कर्मों की बात की गयी है जिनकी सजा करने वाले को नहीं वल्कि किसी दूसरे व्यक्ति को मिल जाया करती थी । अतीत में किये गए इसी तरह के पापों में से एक है इंद्र के द्वारा की गयी ब्रम्हहत्या ।एक बार की बात है देवताओं के गुरु वृहस्पति उनपर नाराज हो गए । इस मौके का फायदा उठाकर असुरों ने स्वर्ग पर हमला कर दिया । गुरु का संरक्षण ना होने के कारण सारे देवता कमजोर पड़ गए और युद्ध हार गए । असुरों ने स्वर्ग छीन लिया और देवता बेघर होकर यहाँ वहां भटकने लगे । स्वर्ग के राजा जब बेघर होकर भाग रहे थे तो उनकी मदद किसी ने नहीं की । ब्रम्हा जी ने उन्हें सलाह दी कि देवराज का यह हाल एक महात्मा का तिरस्कार करने की वजह से हुआ है । अगर देवताओं पर बृहस्पति की कृपा होती हो ये नौबत कभी ना आती । ।ब्रम्हा जी ने कहा की देवराज इंद्र को गुरु कृपा से ही स्वर्ग वापस मिल सकता है इसलिए उन्हें किसी महात्मा की शरण में जाना चाहिए । इंद्र ने वैसा ही किया और एक ज्ञानी महात्मा को प्रसन्न करने के लिए रोज उनकी सेवा करने लगे । महात्मा के लिए यज्ञ की सामग्री लेकर आते, हाथ पैर दबाते और विनम्र भाव से आज्ञा पालन करते । सब कुछ ठीक चल रहा था जब तक इंद्र ने उन महात्मा की ह्त्या नहीं कर डाली । दरअसल इंद्र को पता चला कि वो महात्मा एक असुर के पुत्र थे और यज्ञ में दी गयी सारी आहूतियां असुरों तक पंहुचा रहे थे ।इंद्र ने अपने पाप का फल स्त्रियों को दे दियापहले से ही मुसीबत में पड़े इंद्र पर अब एक और मुसीबत आ गयी क्यूंकि ब्रम्हत्या का पाप भी अब उनपर लगने वाला था । भागवान विष्णु ने इंद्र को इस पाप से बचने की सलाह दी । भागवान के कहे अनुसार इंद्र ने अपने पाप का एक चौताई हिस्सा पेड़ों को, एक चौथाई हिस्सा भूमि को, एक चौथाई हिस्सा महिलाओं को और एक चौथाई हिस्सा जल को दे दिया । इस तरह इंद्र को पाप से मुक्ति मिल गयी लेकिन पाप के एवज में इंद्र ने चारों पात्रों को एक-एक वरदान भी दिया ।इंद्र ने पेड़ों को वरदान दिया कि पेड़ एक बार कटने के बाद अपने आप को पुनः जीवित कर सकेंगे बदले में पेड़ में से गोंद निकलना शुरू हो गया । इसी तरह स्त्री को इंद्र ने वरदान दिया कि पुरुषों के मुकाबले वे चार गुना ज्यादा काम का आनंद ले सकेंगी । इसी तरह जल को इंद्र ने वरदान दिया कि आज से जल में पवित्र करने की शक्ति पायी जाएगी । भूमि को वरदान दिया कि भूमि के गड्ढे अपने आप भर जायेमसिक धर्म का वैज्ञानिक कारणवैज्ञानिकों के मत अनुसार मासिक धर्म एक साधारण प्रक्रिया है । यह स्त्री के सरीर में बने अत्यधिक मासपेशियों से उन्हें निजात दिलाता है । दरअसल स्त्री का शरीर हार्मोन में हुए बदलाव की वजह से नयी मासपेशियों को बनाता है । जब इनका इस्तेमाल नहीं होता तो शरीर इनसे छुटकारा पा लेता है और दोबारा से नयी मासपेशियां बनाना शुरू कर देता है । इतना ही साधारण है मासिक धर्म वैज्ञानिक द्रष्टिकोण से ।पुरुषों को मसिक धर्म क्यों नहीं होता?पुरुषों को इंद्र ने अपने पाप का हिस्सा नहीं दिया था इसलिए उन्हें मासिक धर्म नहीं होता । वैज्ञानिक द्रष्टिकोण से पुरुषों का प्रजनन तंत्र महिलाओं के प्रजनन तंत्र से अलग काम करता है । अब क्यूंकि पुरुष बच्चों को जन्म नहीं देते इसलिए उनका शरीर उसके लिए उतनी मासपेशियां नहीं बनाता ।मासिक धर्म के दौरान मंदिरों में प्रवेश पर प्रतिबंध क्यों?मंदिर में प्रवेश पवित्र व्यक्ति ही कर सकता है । पवित्र मतलब जो शरीर से पवित्र हो । प्राचीन काल में इस नियम का दुरूपयोग किया जाता रहा और छोटी जाती के लोगों को मंदिर में प्रवेश करने से रोका जाता रहा । मासिक धर्म के दौरान महिलाएं शरीर से अपवित्र होती हैं इसलिए उस वक्त उनका मंदिर में प्रवेश निषेध है ।माहवारी से हुयी बीमारियों से बचने के उपायमाहवारी यानि मासिक धर्म के वक्त गंदा कपड़ा इस्तेमाल करने से बचें । इस द्वारान अत्यधिक मेहनती काम करने से बचे ।असामान्य मासिक धर्म से कैसे बचें?मानसिक तनाव से बचें । ऐसा होने पर कुछ दिन के लिए व्ययायाम सम्बन्धी गतिविधियों पर रोक लगाएं । प्राणायाम कर सकते हैं इससे तनाव जायेगा ।क्या जानवरों को मासिक धर्म होता है?वैज्ञानिकों के अनुसार जानवरों को मासिक धर्म नहीं होता, जानवरों में यह काफी काम मात्रा में होता है जिसे वैज्ञानिक भाषा में estrous cycle कहते हैं ।क्या मासिक धर्म को रोका जा सकता है?इस प्रक्रिया को रोका नहीं जा सकता क्यूंकि यह बिलकुल नैसर्गिक है । महिलाओं का शरीर हर महीने बच्चा पैदा करने के लिए अपने आप को तैयार करता है । शरीर को यह पता नहीं होता कि किस महीने स्त्री गर्भवती होगी इसलिए स्त्री का शरीर अपने आप को इस काम के लिए हर महीने तैयार करता रहता है ।दोस्तों कहानी किसी लगी व्हाट्सप्प ग्रुप ज्वाइन करके जरूर बताएं । ग्रुप ज्वाइन करने के लिए यहाँ क्लिक करें – Join Whatsapp । अंत तक बने रखने के लिए आपका शुक्रिया

🌹🪴गीता ज्ञान🪴🌹 मासिक धर्म का कारण है इंद्र के द्वारा किया गया यह पाप   By  बाल वनिता महिला वृद्ध आश्रम मसिक धर्म  मासिक धर्म को लेकर कई मान्यताएं प्रचलित हैं । जहाँ वैज्ञानिक इसे एक जैविक प्रक्रिया बताते हैं वहीँ इसे हमारी प्रचलित मान्यताओं में अपवित्र कहा गया है । इस दौरान महिलाओं का मंदिरों में प्रवेश निषेध है । पवित्र कामों को करने के लिए महिलाओं को मासिक धर्म के वक्त मनाही रहती है । यह विषय हमेसा से ही चर्चा का विषय रहा है और जमाने भर के लेखकों नेऔर दार्शनिकों ने इस पर बहुत कुछ कहा है । हमारा आज का विषय मासिक धर्म से जुड़ी मान्यताओं को सही या गलत ठहरना नहीं है । हम आज आपको बताएँगे कि इस विषय से जुड़ी हमारे धर्म शास्त्रों में कौन सी कहानी बताई गयी है । इंद्र के द्वारा किया गया पाप इंद्र के द्वारा किये गए पाप की सजा सभी महिलाओं को मिली और तब से उन्हें मासिक धर्म की पीड़ा को सहना पड़ता है । हमारे धर्म शास्त्रों में कई तरह के पाप कर्मों की बात की गयी है जिनकी सजा करने वाले को नहीं वल्कि किसी दूसरे व्यक्ति को मिल जाया करती थी । अतीत में किये गए इसी तरह के पापों...

राजा दशरथ के मुकुट का एक अनोखा राज, पहले कभी नही सुनी होगी यह कथा आपने !!!!!!!!!!अयोध्या के राजा दशरथ एक बार भ्रमण करते हुए वन की ओर निकले वहां उनका समाना बाली से हो गया। राजा दशरथ की किसी बात से नाराज हो बाली ने उन्हें युद्ध के लिए चुनोती दी। राजा दशरथ की तीनो रानियों में से कैकयी अश्त्र शस्त्र एवं रथ चालन में पारंगत थी।अतः अक्सर राजा दशरथ जब कभी कही भ्रमण के लिए जाते तो कैकयी को भी अपने साथ ले जाते थे इसलिए कई बार वह युद्ध में राजा दशरथ के साथ होती थी। जब बाली एवं राजा दशरथ के मध्य भयंकर युद्ध चल रहा था उस समय संयोग वश रानी कैकयी भी उनके साथ थी।युद्ध में बाली राजा दशरथ पर भारी पड़ने लगा वह इसलिए क्योकि बाली को यह वरदान प्राप्त था की उसकी दृष्टि यदि किसी पर भी पद जाए तो उसकी आधी शक्ति बाली को प्राप्त हो जाती थी। अतः यह तो निश्चित था की उन दोनों के युद्ध में हर राजा दशरथ की ही होगी।राजा दशरथ के युद्ध हारने पर बाली ने उनके सामने एक शर्त रखी की या तो वे अपनी पत्नी कैकयी को वहां छोड़ जाए या रघुकुल की शान अपना मुकुट यहां पर छोड़ जाए। तब राजा दशरथ को अपना मुकुट वहां छोड़ रानी कैकेयी के साथ वापस अयोध्या लौटना पड़ा।रानी कैकयी को यह बात बहुत दुखी, आखिर एक स्त्री अपने पति के अपमान को अपने सामने कैसे सह सकती थी। यह बात उन्हें हर पल काटे की तरह चुभने लगी की उनके कारण राजा दशरथ को अपना मुकुट छोड़ना पड़ा।वह राज मुकुट की वापसी की चिंता में रहतीं थीं। जब श्री रामजी के राजतिलक का समय आया तब दशरथ जी व कैकयी को मुकुट को लेकर चर्चा हुई। यह बात तो केवल यही दोनों जानते थे।कैकेयी ने रघुकुल की आन को वापस लाने के लिए श्री राम के वनवास का कलंक अपने ऊपर ले लिया और श्री राम को वन भिजवाया। उन्होंने श्री राम से कहा भी था कि बाली से मुकुट वापस लेकर आना है।श्री राम जी ने जब बाली को मारकर गिरा दिया। उसके बाद उनका बाली के साथ संवाद होने लगा। प्रभु ने अपना परिचय देकर बाली से अपने कुल के शान मुकुट के बारे में पूछा था। तब बाली ने बताया- रावण को मैंने बंदी बनाया था। जब वह भागा तो साथ में छल से वह मुकुट भी लेकर भाग गया। प्रभु मेरे पुत्र को सेवा में ले लें। वह अपने प्राणों की बाजी लगाकर आपका मुकुट लेकर आएगा।जब अंगद श्री राम जी के दूत बनकर रावण की सभा में गए। वहां उन्होंने सभा में अपने पैर जमा दिए और उपस्थित वीरों को अपना पैर हिलाकर दिखाने की चुनौती दे दी। रावण के महल के सभी योद्धा ने अपनी पूरी ताकत अंगद के पैर को हिलाने में लगाई परन्तु कोई भी योद्धा सफल नहीं हो पाया।जब रावण के सभा के सारे योद्धा अंगद के पैर को हिला न पाए तो स्वयं रावण अंगद के पास पहुचा और उसके पैर को हिलाने के लिए जैसे ही झुका उसके सर से वह मुकुट गिर गया। अंगद वह मुकुट लेकर वापस श्री राम के पास चले आये। यह महिमा थी रघुकुल के राज मुकुट की।राजा दशरथ के पास गया तो उन्हें पीड़ा झेलनी पड़ी। बाली से जब रावण वह मुकुट लेकर गया तो तो बाली को अपने प्राणों को आहूत देनी पड़ी। इसके बाद जब अंगद रावण से वह मुकुट लेकर गया तो रावण के भी प्राण गए।तथा कैकयी के कारण ही रघुकुल के लाज बच सकी यदि कैकयी श्री राम को वनवास नही भेजती तो रघुकुल सम्मान वापस नही लोट पाता। कैकयी ने कुल के सम्मान के लिए सभी कलंक एवं अपयश अपने ऊपर ले लिए अतः श्री राम अपनी माताओ सबसे ज्यादा प्रेम कैकयी को करते थे।ऐसे और पोस्ट देखने के लिए और खूबसूरत सी कहानीया से जुड़ने के लिए क्लिक करें 👇👇बाल वनिता महिला वृद्ध आश्रम

राजा दशरथ के मुकुट का एक अनोखा राज, पहले कभी नही सुनी होगी यह कथा आपने !!!!!!!!!! अयोध्या के राजा दशरथ एक बार भ्रमण करते हुए वन की ओर निकले वहां उनका समाना बाली से हो गया। राजा दशरथ की किसी बात से नाराज हो बाली ने उन्हें युद्ध के लिए चुनोती दी। राजा दशरथ की तीनो रानियों में से कैकयी अश्त्र शस्त्र एवं रथ चालन में पारंगत थी। अतः अक्सर राजा दशरथ जब कभी कही भ्रमण के लिए जाते तो कैकयी को भी अपने साथ ले जाते थे इसलिए कई बार वह युद्ध में राजा दशरथ के साथ होती थी। जब बाली एवं राजा दशरथ के मध्य भयंकर युद्ध चल रहा था उस समय संयोग वश रानी कैकयी भी उनके साथ थी। युद्ध में बाली राजा दशरथ पर भारी पड़ने लगा वह इसलिए क्योकि बाली को यह वरदान प्राप्त था की उसकी दृष्टि यदि किसी पर भी पद जाए तो उसकी आधी शक्ति बाली को प्राप्त हो जाती थी। अतः यह तो निश्चित था की उन दोनों के युद्ध में हर राजा दशरथ की ही होगी। राजा दशरथ के युद्ध हारने पर बाली ने उनके सामने एक शर्त रखी की या तो वे अपनी पत्नी कैकयी को वहां छोड़ जाए या रघुकुल की शान अपना मुकुट यहां पर छोड़ जाए। तब राजा दशरथ को अपना मुकुट वहां छोड़ रानी कैकेयी के साथ ...