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सितंबर 8, 2022 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

🔯 माता लक्ष्मी की कथा 🔯-----------------------------एक बूढ़ा ब्राह्मण था वह रोज पीपल को जल से सींचता था । पीपल में से रोज एक लड़की निकलती और कहती पिताजी मैं आपके साथ जाऊँगी। यह सुनते-सुनते बूढ़ा दिन ब दिन कमजोर होने लगा तो बुढ़िया ने पूछा की क्या बात है? बूढ़ा बोला कि पीपल से एक लड़की निकलती है और कहती है कि वह भी मेरे साथ चलेगी। बुढ़िया बोली कि कल ले आना उस लड़की को जहाँ छ: लड़कियाँ पहले से ही हमारे घर में है वहाँ सातवीं लड़की और सही।By वनिता कासनियां पंजाबअगले दिन बूढ़ा उस लड़की को घर ले आया। घर लाने के बाद बूढ़ा आटा माँगने गया तो उसे पहले दिनों की अपेक्षा आज ज्यादा आटा मिला था। जब बुढ़िया वह आटा छानने लगी तो लड़की ने कहा कि लाओ माँ, मैं छान देती हूँ। जब वह आटा छानने बैठी तो परात भर गई। उसके बाद माँ खाना बनाने जाने लगी तो लड़की बोली कि आज रसोई में मैं जाऊँगी तो बुढ़िया बोली कि ना, तेरे हाथ जल जाएँगे लेकिन लड़की नहीं मानी और वह रसोई में खाना बनाने गई तो उसने तरह-तरह के छत्तीसों व्यंजन बना डाले और आज सभी ने भरपेट खाना खाया। इससे पहले वह आधा पेट भूखा ही रहते थे।रात हुई तो बुढ़िया का भाई आया और कहने लगा कि दीदी मैं तो खाना खाऊँगा। बुढ़िया परेशान हो गई कि अब खाना कहाँ से लाएगी। लड़की ने पूछा की माँ क्या बात है? उसने कहा कि तेरा मामा आया है और रोटी खाएगा लेकिन रोटी तो सबने खा ली है अब उसके लिए कहाँ से लाऊँगी। लड़की बोली कि मैं बना दूँगी और वह रसोई में गई और मामा के लिए छत्तीसों व्यंजन बना दिए। मामा ने भरपेट खाया और कहा भी कि ऎसा खाना इससे पहले उसने कभी नहीं खाया है। बुढ़िया ने कहा कि भाई तेरी पावनी भाँजी है उसी ने बनाया है। शाम हुई तो लड़की बोली कि माँ चौका लगा के चौके का दीया जला देना, कोठे में मैं सोऊँगी। बुढ़िया बोली कि ना बेटी तू डर जाएगी लेकिन वह बोली कि ना मैं ना डरुँगी, मैं अंदर कोठे में ही सोऊँगी। वह कोठे में ही जाकर सो गई। आधी रात को लड़की उठी और चारों ओर आँख मारी तो धन ही धन हो गया। वह बाहर जाने लगी तो एक बूढ़ा ब्राह्मण सो रहा था। उसने देखा तो कहा कि बेटी तू कहाँ चली? लड़की बोली कि मैं तो दरिद्रता दूर करने आई थी। उसने बूढे के घर में भी आँख से देखा तो चारों ओर धन ही धन हो गया।सुबह सवेरे सब उठे तो लड़की को ना पाकर उसे ढूंढने लगे कि पावनी बेटी कहां चली गई। बूढ़ा ब्राह्मण बोला कि वह तो लक्ष्मी माता थी जो हमारी दरिद्रता दूर करने आई थी । और हमारी दरिद्रता दूर करके चली गई । हे लक्ष्मी माता ! जैसे आपने उनकी दरिद्रता दूर की वैसे ही सबकी करना। 🌺🌼🙏🙏🚩🚩 ।।।।।।।।।।।।। 🌺JAY Mata Di 🌺 ।।।।।।।।।।।।। 🌻🌻🌷🌻🌻🌷🌻🌻🌷🌻🌻🌷🌻🌻

🔯 माता लक्ष्मी की कथा 🔯 ----------------------------- एक बूढ़ा ब्राह्मण था वह रोज पीपल को जल से सींचता था । पीपल में से रोज एक लड़की निकलती और कहती पिताजी मैं आपके साथ जाऊँगी। यह सुनते-सुनते बूढ़ा दिन ब दिन कमजोर होने लगा तो बुढ़िया ने पूछा की क्या बात है? बूढ़ा बोला कि पीपल से एक लड़की निकलती है और कहती है कि वह भी मेरे साथ चलेगी। बुढ़िया बोली कि कल ले आना उस लड़की को जहाँ छ: लड़कियाँ पहले से ही हमारे घर में है वहाँ सातवीं लड़की और सही। By वनिता कासनियां पंजाब अगले दिन बूढ़ा उस लड़की को घर ले आया। घर लाने के बाद बूढ़ा आटा माँगने गया तो उसे पहले दिनों की अपेक्षा आज ज्यादा आटा मिला था। जब बुढ़िया वह आटा छानने लगी तो लड़की ने कहा कि लाओ माँ, मैं छान देती हूँ। जब वह आटा छानने बैठी तो परात भर गई। उसके बाद माँ खाना बनाने जाने लगी तो लड़की बोली कि आज रसोई में मैं जाऊँगी तो बुढ़िया बोली कि ना, तेरे हाथ जल जाएँगे लेकिन लड़की नहीं मानी और वह रसोई में खाना बनाने गई तो उसने तरह-तरह के छत्तीसों व्यंजन बना डाले और आज सभी ने भरपेट खाना खाया। इससे पहले वह आधा पेट भूखा ही रहते थे। रात हु...

द्रोणगिरी गांव द्रोणागिरि पर्वत उत्तराखंड इस गांव में हनुमानजी की पूजा नहीं होती By वनिता कासनियां पंजाब इस गांव का नाम है द्रोणागिरी । उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित है । हनुमानजी यहीं से संजीवनी बूटी लाये थे । या यूं कहें कि पूरा संजीवनी पर्वत ही उखाड़ लाये थे । रोचक बात यह है कि हनुमानजी से जुड़े इस गांव में हनुमानजी की पूजा नहीं होती । शायद देश में यह इकलौता गांव होगा जहां हनुमानजी की पूजा नहीं होती है । कारण बताता हूं - इस गांव के लोग सदियों या सहस्राब्दियों से पर्वत की देवता की पूजा करते आये हैं । पर्वत देवता यानी द्रोणागिरी पर्वत । माना जाता है कि द्रोणागिरी वही पर्वत है जहां से हनुमानजी संजीवनी बूटी लाये थे । गांव वालों का मानना है कि संजीवनी के साथ हनुमानजी जो पर्वत उखाड़ कर ले गए वह वास्तव में उनके पर्वत देवता की एक भुजा थी । गांव के लोगों ने इस काम के लिए कभी हनुमानजी को माफ नहीं किया और आज तक उनसे नाराज हैं । मजेदार बात तो यह भी है कि इस गांव में रामलीला खूब होती है किंतु उसमें से हनुमानजी का पूरा प्रसंग ही गायब कर दिया जाता है । न गांव में हनुमानजी का कोई झंडा ही लगता है, न तस्वीर और न पूजा ही की जाती है । है न दिलचस्प ? यही है विविधता और इस विविधता की स्वीकार्यता ही हिंदुत्व और हिंदुस्तान की आत्मा है, पहचान है । तस्वीरें उसी द्रोणागिरी गांव की हैं

द्रोणगिरी गांव  द्रोणागिरि पर्वत  उत्तराखंड  इस गांव में हनुमानजी की पूजा नहीं होती  By वनिता कासनियां पंजाब इस गांव का नाम है द्रोणागिरी । उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित है । हनुमानजी यहीं से संजीवनी बूटी लाये थे । या यूं कहें कि पूरा संजीवनी पर्वत ही उखाड़ लाये थे । रोचक बात यह है कि हनुमानजी से जुड़े इस गांव में हनुमानजी की पूजा नहीं होती । शायद देश में यह इकलौता गांव होगा जहां हनुमानजी की पूजा नहीं होती है । कारण बताता हूं -        इस गांव के लोग सदियों या सहस्राब्दियों से पर्वत की देवता की पूजा करते आये हैं । पर्वत देवता यानी द्रोणागिरी पर्वत । माना जाता है कि द्रोणागिरी वही पर्वत है जहां से हनुमानजी संजीवनी बूटी लाये थे । गांव वालों का मानना है कि संजीवनी के साथ हनुमानजी जो पर्वत उखाड़ कर ले गए वह वास्तव में उनके पर्वत देवता की एक भुजा थी । गांव के लोगों ने इस काम के लिए कभी हनुमानजी को माफ नहीं किया और आज तक उनसे नाराज हैं ।        मजेदार बात तो यह भी है कि इस गांव में रामलीला खूब होती है किंतु उसमें से हनुमानजी का पूरा ...

💞*पूरी उम्र ससुराल में गुजारी मैंने*💞💞*फिर भी मायके से कफ़न मंगाना*💞💞*मुझे अच्छा नहीं लगता*।😢💞💞*💐"मुझे अच्छा नही लगता"*💐💞 💞मैं रोज़ खाना पकाती हू,तुम्हे बहुत प्यार से खिलाती हूं,पर तुम्हारे जूठे बर्तन उठानामुझे अच्छा नही लगता।😢💞💞कई वर्षो से हम तुम साथ रहते है, लाज़िम है कि कुछ मतभेद तो होगे,पर तुम्हारा बच्चों के सामने चिल्लाना मुझे अच्छा नही लगता।😢💞💞हम दोनों को ही जब किसी फंक्शन मे जाना हो,तुम्हारा पहले कार मे बैठ कर यू हार्न बजानामुझे अच्छा नही लगता।😢💞💞जब मै शाम को काम से थक कर घर वापस आती हूँतुम्हारा गीला तौलिया बिस्तर से उठानामुझे अच्छा नही लगता।😢💞💞माना कि अब बच्चे हमारे कहने में नहीं है,पर उनके बिगड़ने का सारा इल्ज़ाम मुझ पर लगानामुझे अच्छा नही लगता।😢💞💞अभी पिछले वर्ष ही तो गई थी,यह कह कर तुम्हारा,मेरी राखी डाक से भिजवानामुझे अच्छा नही लगता।😢💞💞पूरा वर्ष तुम्हारे साथ ही तो रहती हूँ,पर तुम्हारा यह कहना कि,ज़रा मायके से जल्दी लौट आनामुझे अच्छा नही लगता।😢💞💞तुम्हारी माँ के साथ तोमैने इक उम्र गुजार दी,मेरी माँ से दो बातें करतेतुम्हारा हिचकिचानामुझे अच्छा नहीं लगता।😢💞💞यह घर तेरा भी है हमदम,यह घर मेरा भी है हमदम,पर घर के बाहर सिर्फतुम्हारा नाम लिखवानामुझे अच्छा नही लगता।😢💞💞मै चुप हूँ कि मेरा मन उदास है,पर मेरी खामोशी को तुम्हारा,यू नज़र अंदाज कर जानामुझे अच्छा नही लगता।😢💞💞पूरा जीवन तो मैने ससुराल में गुज़ारा है,फिर मायके से मेरा कफन मंगवानामुझे अच्छा नहीं लगता।😢💞 ❤️ *By वनिता कासनियां पंजाब* ❤️ 💞🙋🏻‍♂️सभी महिलाओं को समर्पित 🤷🏻‍♂️💞�💞MUST READ FOR ALL WOMEN👌👌💞

 💞*पूरी उम्र ससुराल में गुजारी मैंने*💞 💞*फिर भी मायके से कफ़न मंगाना*💞 💞*मुझे अच्छा नहीं लगता*।😢💞 💞*💐"मुझे अच्छा नही लगता"*💐💞   💞मैं रोज़ खाना पकाती हू, तुम्हे बहुत प्यार से खिलाती हूं, पर तुम्हारे जूठे बर्तन उठाना मुझे अच्छा नही लगता।😢💞 💞कई वर्षो से हम तुम साथ रहते है, लाज़िम है कि कुछ मतभेद तो होगे, पर तुम्हारा बच्चों के सामने चिल्लाना मुझे अच्छा नही लगता।😢💞 💞हम दोनों को ही जब किसी फंक्शन मे जाना हो, तुम्हारा पहले कार मे बैठ कर यू हार्न बजाना मुझे अच्छा नही लगता।😢💞 💞जब मै शाम को काम से थक कर घर वापस आती हूँ तुम्हारा गीला तौलिया बिस्तर से उठाना मुझे अच्छा नही लगता।😢💞 💞माना कि अब बच्चे हमारे कहने में नहीं है, पर उनके बिगड़ने का सारा इल्ज़ाम मुझ पर लगाना मुझे अच्छा नही लगता।😢💞 💞अभी पिछले वर्ष ही तो गई थी, यह कह कर तुम्हारा, मेरी राखी डाक से भिजवाना मुझे अच्छा नही लगता।😢💞 💞पूरा वर्ष तुम्हारे साथ ही तो रहती हूँ, पर तुम्हारा यह कहना कि, ज़रा मायके से जल्दी लौट आना मुझे अच्छा नही लगता।😢💞 💞तुम्हारी माँ के साथ तो मैने इक उम्र गुजार दी, मेरी माँ से दो...